Live happy always

Wins “For Whom …” Loss “For Whom … For These” Troubles “For Life …
Whatever comes it will go one day … “Then” this much “ego” to whom?
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If not seen ‘death’, but maybe ‘he’ will be very “beautiful”, …!
Whatever “that is,” which “meets”, “leaves live”.
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Happy i

“Life is small,” I am happy every moment
“I am happy at work,”


“Today is not a paneer,” I am happy with the potatoes
“Today is not a car,” I’m happy on foot

“If no one is with you,” then I am happy alone
“I’m so angry today,” I’m happy with this style.

“Who can not see,” is happy with his voice “which can not find,”. I am happy to think of him

“I have gone yesterday,” I am happy in his sweet memories “I do not know tomorrow’s coming,” I am happy with the wait.

“Laughing is the moment,” I am happy today, “life is small,” I am happy every moment.
Happy

Think

Great minds discuss ideas; average minds discuss events; small minds discuss people.

DEDICATE TRUE & HONEST BANKER

Mene देखा आज एक बैंकर उदास है|

वैसे तो बैंकर पहले भी कई बार उदास हुआ है कभी अपने किसी अजीज की शादी में ड्यूटी से छुट्टी नहीं मिलने से उदास हुआ है तो कई बार ज्यदा काम की वजह से घर लेट होने से उदास हुआ है तो कई बार अपने सहकर्मी या कस्टमर से किसी बात पर हुई बहस से उदास हुआ है पर बैंकर आज उदास है और ऐसा उदास है की जैसे किसी ने उसका दिल तोड़ दिया हो वैसे तो एक बैंकर की दिनचर्या है सुबह 10 से शाम 6 बजे तक अपनी संस्था के लिए ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना पर आज बैंकर उदास है और रास्ते भर उसके मन में यही चलता है की कही किसी कस्टमर ने पेन माग लिया और ना देने पर कही उसके द्वारा ये ना बोल दे की क्या सर 2 रु के पेन की इतनी चिंता और जो 11000 करोड़ गए उसका क्या कुछ चन्द बेईमान और लालची लोगो के कारण ईमानदार कर्तव्य निष्ट लोगो को नजरे झुकाना पड़ रहा है इसलिए आज एक बैंकर उदास है जिन्हें गर्व था की हम एक अच्छी संस्था से जुड़े है जिसके कारण हमे इस समाज में इज्जत रुतबा घर गाड़ी मिली है उसी संस्था के कुछ बेईमान लालची लोगो के कारण आज उन्हें भी वैसी ही नजरो से देखा जा रहा है आज एक बैंकर उदास है  आज उस संस्था की साख दाव पर लगी है जिस संस्था से उसकी इज्ज़त है आज ऐसा लग रहा है मानो उसकी मा या बहन की इज्जत से किसी ने खिलवाड़ की हो……आज एक बैंकर उदास है……..

ABHI TUMKO MERI KADAR NAHI

अभी में तुम्हारे साथ में हु तो तुमको मेरी क़द्र नहीं

जब चला जाऊंगा सदा के लिए तो फिर तुम वापस मुझे कभी न पाओगे

तुम रोओगे चिल्लाओगे सर पीटोगे तुम चीखोगे

लेकिन इतना सब करके भी तुम वापस मुझे कभी न पाओगे

जब बैठोगे तन्हाई में तो मेरी याद सताएगी

सब बोलेंगे की सोजाओ पर फिर भी तुम सो न पाओगे

जब आयेंगे सब तुमसे मिलने तो, उनमें ढून्ढोगे तुम मुझको भी

नजरे थक कर आजाएँगी पर पर तुम मुझको ढून्ढ न पाओगे

जब चला जाऊंगा सदा के लिए तो फिर तुम वापस मुझे कभी न पाओगे

जब बैठोगे तुम अपनों में और बात हमारी निकलेगी

तुम चाहोगे तन्हा होकर रोना पर तुम तन्हा भी न हो पाओगे

जब देखोगे मेरे कपड़ो को तो उनसे लिपट कर रोओगे तुम

क्यों की उन कपड़ो को तुम अब मुझे कभी न पह्ना पाओगे

मेरा चश्मा , घडी , जूते और पेन , सहेज के इनको रखोगे तुम

और सोंचोगे कही से में आजाऊ पर तुम मुझको कंही न पाओगे

तुम तडपोगे तुम रोओगे और अक्सर रोते रोते सो जाओगे

देखूंगा में ये सब, तब भी पर तुम मुझको देख न पाओगे

जब चला जाऊंगा सदा के लिए तो फिर तुम वापस मुझे कभी न पाओगे

में आऊंगा तुम्हारे ख़्वाबो में और बात करूँगा यादोँ में

यह वक़्त गुजरता जायेगा पर तुम मुझको भूल न पाओगे

तुम ख़ुश रहना इस दुनिया में ज्यादा न रोना मेरी खातिर

वरना तुम सांस तो लोगे ही पर जिन्दा न रह पाओगे

जब सुनोगे किसी से बात मेरी तो भागोगे तन्हाई में

जी भर के आंसू बहाओगे तुम खुद को रोक न पाओगे

जब चला जाऊंगा सदा के लिए तो फिर तुम वापस मुझे कभी न पाओगे

HAARA HUA SIKANDAR

क्या तुम्हे याद है जब देखा था मेने तुमको
तो दिल ने कहा तू सुन्दर है जब बात में तुमसे करता था

तो वक़्त ठहर सा जाता था चेहरे पे ख़ुशी आ जाती थी

आज गम दिल के अन्दर है

मिलने के लिए जब तुम आती थी और खुशियाँ देकर जाती थी

हर पल याद उन्ही को करता हु आज दिल में एक बबंडर है

वो नाजुक नाजुक होंठ तेरे फूलो की तरह चेहरा था तेरा

और झील सी तेरी आँखे थी आज मेरी आँखों में समंदर है

वो प्यार जो हम तुम करते थे वो प्यार तो जिन्दा आज भी है

लेकिन जो सपना था वो टूट गया आज हारा हुआ सिकंदर है

TERE NAAM SE JO TADAP JAYE

तुम क्या जानो तन्हाई
तेरे नाम से जो तड़प जाये वो इन्सान हु में

तेरी यादो से बहोत ज्यादा परेसान हु में

जब भी मिलती थी तो मुस्कुराती थी तुम

और आँखों से यह कहती थी की तेरी जान हू में

फिर इस भीड़ में न जाने तुम कहाँ खो गयी

यह कहते हुए की तुमसे अनजान हु में

आज तुमने मुझे इतना क्यों दर्द दिया

कभी चाहा था जिसे तुमने वही इन्सान हु में