HAARA HUA SIKANDAR

क्या तुम्हे याद है जब देखा था मेने तुमको
तो दिल ने कहा तू सुन्दर है जब बात में तुमसे करता था

तो वक़्त ठहर सा जाता था चेहरे पे ख़ुशी आ जाती थी

आज गम दिल के अन्दर है

मिलने के लिए जब तुम आती थी और खुशियाँ देकर जाती थी

हर पल याद उन्ही को करता हु आज दिल में एक बबंडर है

वो नाजुक नाजुक होंठ तेरे फूलो की तरह चेहरा था तेरा

और झील सी तेरी आँखे थी आज मेरी आँखों में समंदर है

वो प्यार जो हम तुम करते थे वो प्यार तो जिन्दा आज भी है

लेकिन जो सपना था वो टूट गया आज हारा हुआ सिकंदर है

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