TERE NAAM SE JO TADAP JAYE

तुम क्या जानो तन्हाई
तेरे नाम से जो तड़प जाये वो इन्सान हु में

तेरी यादो से बहोत ज्यादा परेसान हु में

जब भी मिलती थी तो मुस्कुराती थी तुम

और आँखों से यह कहती थी की तेरी जान हू में

फिर इस भीड़ में न जाने तुम कहाँ खो गयी

यह कहते हुए की तुमसे अनजान हु में

आज तुमने मुझे इतना क्यों दर्द दिया

कभी चाहा था जिसे तुमने वही इन्सान हु में

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *